Posts

Showing posts from June, 2018

D.l.ed.

    Chairman Message     Process and Duties     Study Material (अध्ययन सामग्री)     FAQs     Contact     Correspondence section Online Submission of II Year Registration Fees started from 7th June 2018.     Banner DLED Live interactivity     Banner DLED Previous Next Teacher (शिक्षक) Section (अनुभाग) Information for Registered In-Service Teacher Exam / Study Centre Corner Study Centre Corner for all the activities. For Regional Centre/State Regional Centre/State Nodal Officer/State Coordinator for monitoring Dash Board For Reports For MHRD, NIOS DPC Coordinator -To view Various Reports for Day to Day Monitoring. Online Submission of II Year Registration Fees (Only for already registred Teachers) Notice for Submission of II Year Registration Fees About NIOS-D.El.Ed - Training for the un-trained in-service Teacher Diploma in Elemen...

ENGLISH GRAMMAR

Acharya Angad ji ORTHOGRAPHY(वर्ण विचार) What is LETTERS(अक्षर/वर्ण)?

ENGLISH GRAMMAR

Acharya Angad ji Grammar What is grammar? ACHARYA ANGAD CHAUPAL RAJENDRA SARSWATI SHISHU MANDIR BIRAUL . Ans- grammar is a science of structure and uses of a language through which we learn the art of speaking, reading, waiting and listening of a language correctly.  2.  How many kinds of grammar? Ans- There are five kinds of grammar.  Orthography Etymology Syntax Punctuation Prosody

श्रि कृष्ण जन्म कब कहा कैसे ?

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल मे वासुदेव जी की पत्नि देवी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओ से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था । इस तिथि को रोहिणी नक्षत्र का विशेष माहात्म्य है। इस दिन देश के समस्त मन्दिरो का श्रृंगार किया जाता है कृष्णावतार के उपलक्ष मे झाँकियाँ सजायी जाती है। भगवान कृष्ण का श्रृगार करके झूला सजाया जाता है। स्त्री-पुरूष रात के बारह बजे तक व्रत रखते है रात को बारह बजे शंख तथा घंटो की आवाज से श्रीकृष्ण की जन्म की खबर चारो दिशाओ में गूज उठती है। भगवान श्रीकृष्ण की आरती उतारी जाती है और प्रसाद वितरण किया जाता है प्रसाद ग्रहण कर व्रत को खोला जाता है । कथाः द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसो के अत्याचार बढने लगे पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी कथा सुनाने के लिए तथा उदार के लिए ब्रह्याजी के पास गई। ब्रह्याजी सब देवताओ को साथ लेकर पृथ्वी को विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु अन्नत शैया पर शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई भगवान ने ब्रह्या एवं सब देवताओ को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोल...

हनुमान पुत्र मकरध्वज की कहानी

पवनपुत्र हनुमान बाल-ब्रह्मचारी थे। लेकिन मकरध्वज को उनका पुत्र कहा जाता है। यह कथा उसी मकरध्वज की है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका जलाते समय आग की तपिश के कारण हनुमानजी को बहुत पसीना आ रहा था। इसलिए लंका दहन के बाद जब उन्होंने अपनी पूँछ में लगी आग को बुझाने के लिए समुद्र में छलाँग लगाई तो उनके शरीर से पसीने के एक बड़ी-सी बूँद समुद्र में गिर पड़ी। उस समय एक बड़ी मछली ने भोजन समझ वह बूँद निगल ली। उसके उदर में जाकर वह बूँद एक शरीर में बदल गई। एक दिन पाताल के असुरराज अहिरावण के सेवकों ने उस मछली को पकड़ लिया। जब वे उसका पेट चीर रहे थे तो उसमें से वानर की आकृति का एक मनुष्य निकला। वे उसे अहिरावण के पास ले गए। अहिरावण ने उसे पाताल पुरी का रक्षक नियुक्त कर दिया। यही वानर हनुमान पुत्र ‘मकरध्वज’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जब राम-रावण युद्ध हो रहा था, तब रावण की आज्ञानुसार अहिरावण राम-लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल पुरी ले गया। उनके अपहरण से वानर सेना भयभीत व शोकाकुल हो गयी। लेकिन विभीषण ने यह भेद हनुमान के समक्ष प्रकट कर दिया। तब राम-लक्ष्मण की सहायता के लिए हनुमानजी पाताल पुरी पहुँचे।...